रंगमंच: सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर माध्यम

एक कहावत है "अच्छा व्यक्ति होने के लिए अच्छा वक्ता होना बहुत आवश्यक है " ।हम अपनी बात अगर उसी रूप में रख पाते हैं जिस रूप में रखना चाहते हैं तो यह हमारी योग्यता है।लोगों के चिड़चिड़े होने का सबसे बड़ा कारण यही होता है कि वह अपनी बात उचित ढंग से कह नहीं पाते हैं, दूसरों को अपनी बात समझा नहीं पाते हैं। जब हम अपनी भावनाओं को समझाने के लिए, व्यक्त करने के लिए अपनी भाषा का प्रयोग करते हैं तो उस भाषा में शुद्धता होनी चाहिए , पकड़ होनी चाहिए तभी हम अपनी भावनाओं को उचित रूप में व्यक्त कर पाएंगे ,अभिव्यक्ति दे पाएंगे; अन्यथा यह हमारे लिए बहुत बड़ा बोझ हो जाएगा। रंगमंच भाषा पर पकड़ बनाने या भावनाओं को व्यक्त करने का एक बहुत बड़ा माध्यम हो सकता है। जब हम किसी पात्र में खुद को प्रवेश कराते हैं तो उसकी भावनाओं को समझना होता है, उसकी भावनाओं को आत्मसात करना होता है तबजाकर हमारे भीतर पात्र समा पाता है इससे हम या कोई भी जो अभिनय कर रहा होता है वह खुद को प्राप्त करता है । खुद को जान लेने के बाद कुछ भी मुश्किल नहीं रह जाता है । आज हमारे शहर में युवा बहुत मात्रा में रंगमंच की ओर आकर्षित हो रहे हैं ।यह एक सकारात्मक बदलाव है जिसका दूरगामी परिणाम आएगा। रंगमंच, खेल आदि ऐसे माध्यम हैंं जिससे छात्रों में पूर्णता आ सकती है।सिर्फ क्लास रूम में बैठे रहने से सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता इसके लिए तो अनुभव चाहिए। नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए लोगों के बीच तो आना ही होगा । बच्चों के सांस्कृतिक विकास के लिए बिहार सरकार ने किलकारी नामक संस्था की स्थापना की । ऐसे संस्थानों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे भी लाभ ले पाते हैं यह एक सुखद बात है। किलकारी जैसे संस्था से खजूर जैसे कलाकार निकलकर आते हैं तो सुखद अनुभव होता है। भाषाई कमजोरी दूर करने के लिए भी एक संस्था होनी चाहिए जो ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को और शहरों के भी जरूरतमंद छात्रों को भाषाई स्तर पर तक्ष कर सके । भाषा में दक्ष नहीं होने के कारण छात्र अपनी भावनाओं को सही तरह से अभिव्यक्ति नहीं दे पाते हैं जिस कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है । उर्दू भाषा के अध्ययन के लिए सरकार अपने स्तर पर पहल कर रही है ; ठीक उसी तरह हिंदी और अंग्रेजी के लिए भी पहल होनी चाहिए जो हम छात्रों के लिए लाभदायक होगा। आनंद प्रवीण, कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पटना।

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