2016-19 सेशन के छात्रों को स्नातक की डिग्री 2020 जनवरी तक भी अगर मिल जाती है तो स्नातकोत्तर के लिए अन्य विश्वविद्यालयों में वे नामांकन करा पाएंगे। उनका एक वर्ष ही बर्बाद होगा।
2015- 18 सेशन के छात्र भी अभी तक अपने रिजल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। उन लोगों के पार्ट -3 की परीक्षा को छह माह से अधिक होने को है पर अभी तक फाइनल रिजल्ट नहीं आया है। अब अगर रिजल्ट आता भी है तो कुछ बड़े विश्वविद्यालयों में वे इस वर्ष नामांकन नहीं करा पाएंगे।
मैं 2016-19 सेशन का छात्र हूँ पर उम्मीद करता हूँ कि 2020 जनवरी तक बीए पास कर जाऊँ। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एवं दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में नामांकन की प्रक्रिया मार्च में शुरू हो जाती है। इसलिए चाहता हूँ कि 2020 जनवरी तक मेरा स्नातक हो जाए। पर मेरे चाहने से क्या होगा ? मैं किसी नेता ,उद्योगपति या बड़े पदाधिकारी का बेटा तो हूँ नहीं! होता तो ऐसे घटिया विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ रहा होता। अगर ऐसी जगहों पर पढ़ता भी तो उद्देश्य कुछ दूसरा होता। मैं एक मज़दूर परिवार से हूँ। हमारे लिए पटना में रहना ही बड़ी बात हो जाती है और ऐसी स्थिति में तो होगी ही जब तीन साल की डिग्री प्राप्त करने के लिए पाँच साल लगते हैं।
पढ़ाई के अलावा मेरे जीवन में और कुछ नहीं है। अगर यहाँ हम पिछड़ जाते हैं तो और कुछ नहीं कर पाएंगे। मज़दूर बनना भी मेरे लिए मुश्किल होगा क्योंकि तजुर्बा कहता है कि अपनी संगत छोड़ने के बाद अगर चाहत की संगत न मिले तो आदमी कहीं का नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में किसी का असामाजिक हो जाना कोई ताज्जुब की बात नहीं।
हमलोगों के पार्ट-2 की परीक्षा इस वर्ष मार्च में होने वाली थी। प्रवेश- पत्र आ भी चुका था पर आम चुनाव के कारण परीक्षा को टाल दिया गया। ये सब इस तरह हुआ जैसे विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग को पता ही नहीं था और अचानक से आम चुनाव आ गया। ख़ैर पार्ट-2 की परीक्षा अभी हो रही है। परिणाम कब तक आएगा पता नहीं।
2015-18 सेशन के छात्र फाइनल रिजल्ट के लिए धरना प्रदर्शन कर आश्वासन पर 20 तारीख का इंतज़ार कर रहे हैं। 2017- 20 सेशन के छात्रों के पार्ट - 1 की परीक्षा इसी महिने में 26 तारीख से होने वाली है जबकि अब तक उनका पार्ट - 2 हो जाना चाहिए था। 2018- 21 सेशन के छात्रों का और भी बुरा हाल है ; अभी तक उनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में छात्रों की मनोदशा का अनुमान लगाया जा सकता है। अगर हम छात्रों की स्थिति नहीं बदली तो हमें अपना रास्ता बदलना होगा। जीवन को एक नई दिशा देनी होगी। वह दिशा क्या होगी अभी कहा नहीं जा सकता पर दिशा बदलनी होगी।
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