भारतीय मुद्रा पर गाँधी जी

बेशक आज का भारत गाँधी का भारत है। गाँधी और अंबेडकर का भारत है। कुछ विकृतियों के आ जाने से पूरा देश खराब नहीं होता और हाल के आंदोलनों से तो मैं यक़ीन से कह सकता हूँ कि हमारे देश में कभी भी साम्प्रदायिक ताकतों को पसंद नहीं किया जाएगा। न ही किसी धर्म को देश आश्रय देगा। आज हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि आदिवासी हिंदू नहीं है कल कोई दलित नेता कहेंगे दलित हिंदू नहीं है। ऐसे में हिंदुओं का यह भ्रम दूर हो जाएगा कि हम धर्म के नाम पर सत्ता पा लेंगे। आपका मानना है कि गाँधी जी के आदर्शों पर अन्ना हजारे और ऐसे ही कुछ शिष्यों के अलावा कोई नहीं चल रहा। ऐसा आपको इसलिए लग रहा है क्योंकि गोडसे को मानने वालों ने गाँधी के ख़िलाफ़ पूरी ताकत लगाकर प्रचार किया है जिससे लोग सच्चाई को देख नहीं पा रहे हैं। जैसे ही वे सच्चाई से अवगत होते हैं गाँधी जी का वास्तविक रूप दिखने लगता है। आपने आगे कहा है कि दलित समाज मानता है कि उनके मुख्य नेता अंबेडकर हैं। कृपया आप बताइये आप क्या मानते हैं? दलितों का मुख्य नेता कौन हैं? अगर आपके पास अंबेडकर के अलावा कोई विकल्प है तो इसका मतलब है कि दलित समाज अब तक अंधेरे में था। अगर नहीं तो आपको ये कहना चाहिए कि भारतीय दलित समाज के मसीहा अंबेडकर। नोट पर गाँधी की तस्वीर की जहाँ तक बात है तो मैं पूरी तरह से समर्थन में हूँ। फिर आपका ये कहना कि कम्यूनिस्टों के प्रमुख नेता भगत सिंह हैं इसलिए उन्हें आज़ादी है कि वह नोट पर भगत सिंह की तस्वीर की पैरवी करे। सही बात है। पर हमारे देश में सैंकड़ों पार्टियां हैं। सबके अपने- अपने आदर्श हैं। फिर तो सभी चाहेंगे कि उनके आदर्श को नोट पर जगह मिले। इसलिए नोट पर भगत सिंह की तस्वीर से मुझे आपत्ति है और हर उस भारतीय को इस बात पर आपत्ति होना चाहिए जो देश में अमन चाहता है।

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